आज हमारे विद्यालय का कोना-कोना तिरंगे के रंगों में रंगा नजर आया। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर विद्यालय में एक भव्य और गौरवपूर्ण समारोह का आयोजन किया गया। यह दिन हमें याद दिलाता है कि 1950 में इसी दिन हमारा संविधान लागू हुआ था, जिसने हमें एक संप्रभु और लोकतांत्रिक राष्ट्र की पहचान दी।
शानदार ध्वजारोहण और राष्ट्रगान
सुबह ठीक 8:30 बजे मुख्य अतिथि और हमारे प्रधानाचार्य जी द्वारा ध्वजारोहण (Flag Hoisting) किया गया। जैसे ही तिरंगा आसमान में लहराया, पूरा परिसर 'जन-गण-मन' की गूँज से भर गया। राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े हर विद्यार्थी और शिक्षक की आँखों में अपने देश के प्रति गर्व साफ झलक रहा था।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की झलकियाँ
ध्वजारोहण के बाद विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा से समां बाँध दिया:
देशभक्ति गीत: विद्यालय के संगीत दल ने 'ऐ वतन, मेरे वतन' और 'माँ तुझे सलाम' जैसे गीतों से सबका मन मोह लिया।
लोक नृत्य: विभिन्न राज्यों की संस्कृति को दर्शाते हुए छात्रों ने भांगड़ा, घूमर और बिहू नृत्य प्रस्तुत किए, जो भारत की 'अनेकता में एकता' का प्रतीक थे।
भाषण प्रतियोगिता: छोटे बच्चों ने वीर क्रांतिकारियों के वेश में उनके प्रसिद्ध नारों को दोहराकर इतिहास की यादें ताज़ा कर दीं।
प्रधानाचार्य जी का प्रेरक संदेश
समारोह के अंत में प्रधानाचार्य जी ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि, "गणतंत्र का असली अर्थ केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का पालन करना भी है।" उन्होंने छात्रों को एक जिम्मेदार नागरिक बनने और देश की प्रगति में योगदान देने की शपथ दिलाई।
समापन और मिष्ठान वितरण
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत 'वन्दे मातरम' के साथ हुआ। इसके बाद सभी विद्यार्थियों और अतिथियों को मिठाई बांटी गई। हर चेहरे पर मुस्कान और दिल में 'जय हिंद' का जज्बा लिए यह दिन हमारे लिए यादगार बन गया।
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