स्वामी विवेकानंद जयंती: हमारे विद्यालय में 'राष्ट्रीय युवा दिवस' का उत्साहपूर्ण आयोजन


आज हमारे विद्यालय में स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती को 'राष्ट्रीय युवा दिवस' के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह दिन केवल एक महापुरुष का जन्मदिन नहीं, बल्कि हम युवाओं के लिए अपने संकल्पों को दोहराने और ऊर्जा से भर जाने का दिन है।

कार्यक्रम की मुख्य झलकियाँ:

  • पुष्पांजलि और दीप प्रज्वलन: कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानाचार्य जी और मुख्य अतिथि द्वारा स्वामी जी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। पूरा वातावरण 'स्वामी विवेकानंद अमर रहें' के नारों से गूँज उठा।

  • प्रेरणादायक भाषण: कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों ने स्वामी जी के जीवन, उनके शिकागो व्याख्यान और उनके महान विचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे स्वामी जी ने भारतीय संस्कृति का परचम पूरी दुनिया में लहराया।

  • सांस्कृतिक कार्यक्रम: छोटे बच्चों ने स्वामी जी के जीवन के प्रसंगों पर एक लघु नाटिका (Skit) प्रस्तुत की, जिसने सभी का मन मोह लिया।

स्वामी जी का वह संदेश जो आज भी गूँजता है:

विद्यालय के प्रधानाचार्य जी ने अपने संबोधन में स्वामी जी के सबसे प्रसिद्ध मंत्र को साझा किया:

"उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।"

उन्होंने छात्रों को प्रोत्साहित किया कि वे केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि अपने चरित्र निर्माण और राष्ट्र सेवा पर भी ध्यान दें।

निष्कर्ष:

इस आयोजन ने हम सभी विद्यार्थियों में एक नई ऊर्जा का संचार किया है। स्वामी विवेकानंद के विचार आज के डिजिटल युग में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पहले थे। आज हमने यह संकल्प लिया कि हम उनके बताए गए सत्य, पवित्रता और निस्वार्थ सेवा के मार्ग पर चलने का प्रयास करेंगे।

चलो, हम सब मिलकर एक सशक्त और शिक्षित भारत का निर्माण करें!

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